
ग्रह बृहस्पति को गुरु के रूप में जाना जाता है, जबकि, “चांडाल” शब्द का अर्थ एक व्यक्ति है जो बहिष्कृत है और “योग” का अर्थ है ‘संघ’ या ‘जुड़ना’। गुरु चांडाल दोष का निर्माण अगर किसी की कुंडली में राहु या केतु बृहस्पति के साथ स्थित हैं या गुरु का राहु या केतु के साथ दृष्टि संबंध है तो कुंडली में गुरु चांडाल योग बनता है, जिसके कारण व्यक्ति के जीवन में परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसा व्यक्ति अनैतिक या अवैध गतिविधियों में शामिल हो सकता है।
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गुरु चांडाल योग का कुंडली मे अलग-अलग प्रभाव
यदि कुंडली के पहले भाव में गुरु और राहु एक साथ बैठे होते हैं तो जातक संदिग्ध चरित्र वाला होता है और गलत तरीकों से धन अर्जित करने की कोशिश करता है।
वहीं दूसरे भाव में इस योग के बनने से जातक धनवान तो होता है लेकिन भोग विलासिता की चीजों पर धन अपव्यय करता है। गुरु के कमजोर होने पर जातक नशे की आदी हो सकता है।
कुंडली के तीसरे भाव में गुरु और राहु की युति जातक को साहसी और पराक्रमी तो बनाती है लेकिन राहु की मजबूत स्थिति जातक को गलत कार्यों के लिए कुख्यात कर देती है। जातक जुएं के जरिए धन कमाने लगता है।
यदि कुंडली के चौथे भाव में गुरु चांडाल योग बनता है तो जातक समझदार और बुद्धिमान होता है। लेकिन गुरु की स्थिति कमजोर होने के कारण व्यक्ति पारिवार के प्रति रुचि नहीं लेता है और घर में अशांति बनी रहती है।
कुंडली के पांचवें घर में गुरु और राहु की युति से संतान को कष्ट झेलना पड़ता है और संतान अनैतिक कार्यों में शामिल हो जाता है। गुरु की कमजोर स्थिति की वजह से उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता है और मन अस्थिर बना रहता है।
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कुंडली के छठें भाव में इस योग के निर्माण से जातक बीमारियों से जूझता रहता है और उसकी कमर के नीच हमेशा दर्द बना रहता है।
यदि किसी जातक की कुंडली के सातवें भाव में गुरु कमजोरी और राहु बलवान होता है तो जातक के वैवाहिक जीवन में हमेशा विवाद बना रहता है और जीवनसाथी के साथ तालमेल बना पाना काफी मुश्किल होता है।
यदि कुंडली के आठवें घर में गुरु चांडाल योग बनता है तो जातक के बहुत चोट लगती है और जीवनभर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। यहां तक कि राहु बलवान होने से जातक खुदकुशी की भी कोशिश कर सकता है।
यदि नौवें भाव में गुरु और राहु की युति होती है तो जातक का माता-पिता से हमेशा विवाद बना रहता है और समाज में अपयश की प्राप्ति होती है।
कुंडली के दशवें भाव कुंडली के दशवें भाव में गुरु चांडाल योग बनने से जातक के मान-सम्मान, पद और प्रतिष्ठा में कमी आ जाती है और कार्यक्षेत्र में लगातार बदलाव करता रहता है।
कुंडली के ग्यारहवें भाव में इस योग के निर्माण से जातक गलत तरीके से धन कमाता है और मित्रों की संगति अच्छी नहीं होती है और अनैतिक कार्यों को करने में मन लगता है।
कुंडली के द्वादश भाव में गुरु कमजोर होने और राहु बलवान होने से व्यक्ति नास्तिक बन जाता है और धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देता है।
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गुरु चांडाल योग को कम करने के उपाय
- जातक को गुरु और राहु को शांत करने के लिए शांतिपाठ करवाना चाहिए।
- अपने माता-पिता, शिक्षक और वृद्ध लोगों की सेवा करनी चाहिए।
- भगवान विष्णु की पूजा विष्णु सहस्रनाम का जाप करने से गुरु चांडाल योग के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
- रुद्राक्ष धारण करें जिससे राहु, केतु और गुरु की नकारात्मकता दूर होती है।
- गुरु चांडाल दोष के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए भगवान गणेश की नियमित रूप से पूजा करे।
- जातक सोने के साथ पीला नीलम पहन सकत है।
- बृहस्पति मंत्र ओम ब्रम्ब्रीं ब्रौं स: गुरवे नम: का नियमित रूप से ध्यान और जप करें।
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प.श्यामगुरु (तंत्र साधक) तीर्थपुरोहित
ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद
श्री सिद्ध नारायण धाम ज्योतिष कार्यालय उज्जैन
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