महाशिवरात्रि पर्व पर महाकालेश्वर मंदिर में होगे सुलभ दर्शन
महाकाल मंदिर प्रशासक ने अधिकारियों के साथ वन टू वन मीटिंग कर दिये निर्देश
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उज्जैन। महाशिवरात्रि पर्व के दिन महाकालेश्वर मंदिर में देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए आएंगे। इस दौरान भक्तों की सुरक्षा, सुलभ दर्शन के लिए गुरुवार को महाकाल मंदिर में प्रशासक ने सभी नए अधिकारियों के साथ वन टू वन मीटिंग कर निर्देश दिए।
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महाकालेश्वर मंदिर उप प्रशासक एसएन सोनी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को प्रवेश भील समाज की धर्मशाला के पास से मिलेगा। इस दौरान भक्तों को करीब 2.5 किमी पैदल चलना पड़ेगा हालांकि भक्तों की सुविधा के लिए बीच में पानी, वाशरूम की व्यवस्था के साथ साथ भजन मंडली की व्यवस्था भी की जायेगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस बार 200 अतिरिक्त जवान हायर करने के लिए क्रिस्टल कम्पनी को कहा जा रहा है। इसके अलावा होमगार्ड के जवानों की भी मदद ली जाएगी।
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सामान्य दर्शनार्थी की व्यवस्था
भील समाज की धर्मशाला के पास जूते-चप्पल उतार कर चारधाम मंदिर पार्किंग के पास से शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप से नंदी द्वार भवन, फेसेलिटी सेंटर 1 टनल, गणेश मंडपम से भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन करेंगे। दर्शन के बाद नई टनल से दर्शनार्थी बाहर जाने के लिए बड़ा गणेश मंदिर के समीप हरसिद्धि मंदिर तिराहा पुन: चारधाम मंदिर पर पहुंचकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करेंगे।
वीआईपी-प्रवेश व्यवस्था
नीलकंठ द्वार से त्रिनेत्र के सामने से होकर शंखद्वार, कोटितीर्थ कुंड के सामने से सभा मंडपम् से महाकालेश्वर मंदिर में प्रवेश करेंगे। निर्गम : दर्शन के बाद सभा मंडपम् से कोटितीर्थ कुंड, शंखद्वार से त्रिनेत्र होकर नीलकंठ द्वार से मंदिर के बाहर जाएंगे।
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घटाटोप स्वरूप में हुआ श्रृंगार
श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। 17 से 25 फरवरी तक बाबा महाकाल नौ अलग-अलग रूपों में भक्तों के दर्शन दे रहे हैं। मंदिर के पुजारी नवनीत गुरु ने बताया कि शिवनवरात्रि के चौथे दिन गुरुवार को संध्या पूजन के बाद बाबा महाकाल को घटाटोप स्वरूप में सजाया गया। प्रात:काल भस्म आरती के बाद शासकीय पुजारी घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में 11 ब्राह्मणों ने एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ भगवान का अभिषेक किया। संध्या पूजन के पश्चात बाबा श्री महाकाल को नए वस्त्र धारण करवाए गए। भगवान महाकाल का श्रृंगार मेखला, दुपट्टा, मुकुट, छत्र, नाग कुण्डल, मुंडमाला एवं फलों की माला से किया गया। भगवान श्री महाकालेश्वर जी के इस अलौकिक दर्शन का पुण्य लाभ श्रद्धालुओं को रात्रि होने वाली शयन आरती तक प्राप्त होता है।
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मंदिर परिसर में चल रही है शिव कथा
शिवनवरात्रि पर्व पर महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सांय 4.30 से 6 बजे तक शिव कथा व हरिकथा कीर्तन का आयोजन चल रहा है। मंदिर परिसर में शाम 4:30 से 6 बजे तक शिव कथा और हरिकथा कीर्तन का आयोजन चल रहा है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए श्रावण मास, प्रदोष व्रत, सोमवार, मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है।
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